प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में बड़ा अपडेट: January की नई लिस्ट जारी, जानें किसे मिलेगा फायदा

Published on. January 15, 2026

पिछले कुछ महीनों से बहुत से घरों में एक ही सवाल घूम रहा है — “सोलर रूफटॉप का आवेदन तो कर दिया था, फिर भी नाम सूची में क्यों नहीं दिख रहा?” किसी को लग रहा है कि सब्सिडी अटक गई है, किसी को लगता है कि पोर्टल में ही गड़बड़ है। जनवरी में जब प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का नया डेटा अपडेट हुआ, तब जाकर यह साफ हुआ कि दिक्कत योजना में नहीं, बल्कि प्रक्रिया को समझने के तरीके में है।

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रूफटॉप सोलर कोई ऐसा काम नहीं है जिसमें सिर्फ फॉर्म भरने से नतीजा मिल जाए। यहाँ हर चरण पर काम पूरा होना और उसकी पुष्टि होना ज़रूरी है। दिसंबर की नई लाभार्थी सूची इसी सच्चाई को दिखाती है।

दिसंबर की नई सूची में असल बदलाव क्या सामने आया

10 जनवरी 2025 को राष्ट्रीय रूफटॉप सोलर पोर्टल पर नवंबर तक की सभी applications, approvals और installations का डेटा अपडेट किया गया। इसके बाद कई राज्यों ने अपनी बिजली वितरण कंपनियों (DISCOM) के ज़रिए ज़िला और सर्किल स्तर की सूचियाँ भी जारी कीं। इन सूचियों को देखने से एक बात साफ होती है —

लाभार्थी वही माने गए हैं जिनके घरों में सोलर सिस्टम लग चुका है और उसे चालू मान लिया गया है। जिन मामलों में सिर्फ कागज़ी मंजूरी हुई है, वे अभी अंतिम सूची में नहीं आए हैं। यहीं पर ज़्यादातर लोग गलती कर बैठते हैं। उन्हें लगता है कि आवेदन स्वीकार होते ही नाम अपने-आप लिस्ट में आ जाएगा, जबकि rooftop solar में ज़मीन पर हुआ काम सबसे बड़ा पैमाना होता है।

सब्सिडी और 300 यूनिट मुफ्त बिजली का सही मतलब

इस योजना के तहत 1 से 3 किलोवाट तक का ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर लगवाने पर केंद्र सरकार की तरफ से प्रति किलोवाट लगभग 30,000 रुपये तक की सहायता मिलती है। 3 किलोवाट से ऊपर कुल सब्सिडी की एक तय सीमा होती है। कुछ राज्य, जैसे उत्तर प्रदेश, इसके ऊपर अपनी तरफ से अतिरिक्त सहायता भी जोड़ रहे हैं। ऐसे मामलों में कुल मदद 1 लाख रुपये से थोड़ी ज़्यादा तक पहुँच सकती है, लेकिन यह हर घर के लिए समान नहीं होती।

300 यूनिट मुफ्त बिजली को लेकर सबसे ज़्यादा भ्रम है। यह कोई अलग से मिलने वाला लाभ नहीं है, बल्कि सोलर से बनने वाली बिजली का व्यावहारिक असर है। अगर सिस्टम की क्षमता और घर की खपत ठीक बैठती है, तो महीने का बिल लगभग शून्य तक आ सकता है।

किसे सीधा फायदा मिलता है और किसे नहीं

इस योजना का लाभ वही घर उठा पाते हैं जिनकी स्थिति कागज़ पर भी साफ हो और ज़मीन पर भी। घर का मालिक वही होना चाहिए जिसके नाम पर बिजली कनेक्शन है। मीटर residential श्रेणी का होना चाहिए और बिजली बिल का रिकॉर्ड नियमित होना ज़रूरी है।

बहुत लोग यहीं चूक जाते हैं। कहीं मीटर किसी और के नाम पर होता है, कहीं श्रेणी गलत होती है, तो कहीं पुराने पते की वजह से फाइल अटक जाती है। ऐसे मामलों में आवेदन आगे बढ़ ही नहीं पाता। यह ठीक वैसा ही है जैसे गांव में राशन कार्ड की सूची लगती है और बाद में पता चलता है कि नाम इसलिए नहीं आया क्योंकि पता या दस्तखत गलत थे।

ज़्यादातर आवेदन किन वजहों से अटक रहे हैं

दिसंबर के आंकड़े साफ बताते हैं कि registrations बहुत ज़्यादा हैं, लेकिन actual installations अभी लक्ष्य से काफी पीछे हैं। इसका मतलब है कि लाखों आवेदन बीच के किसी चरण में रुके हुए हैं। कहीं DISCOM की inspection में देरी है, कहीं vendor तय नहीं हुआ, तो कहीं उपभोक्ता की तरफ से भुगतान या दस्तावेज़ समय पर पूरे नहीं हुए।

जिन घरों ने inspection के लिए समय दिया, क्षमता तय की और net-metering से जुड़ी औपचारिकताएँ पूरी कीं, उनकी फाइल तेज़ी से आगे बढ़ी। जो लोग सिर्फ आवेदन करके इंतज़ार करते रहे, वे आज भी “process में” वाले status पर अटके हुए हैं।

Approval और Commissioning का फर्क समझना क्यों ज़रूरी है

बहुत कम लोग यह फर्क साफ समझते हैं। Approval का मतलब है कि कागज़ पूरे पाए गए हैं। Commissioning का मतलब है कि सिस्टम लगकर चालू हो चुका है।सब्सिडी और मुफ्त बिजली का असली लाभ commissioning के बाद ही माना जाता है। यही वजह है कि कई लोगों का आवेदन मंजूर होने के बावजूद नाम लाभार्थी सूची में नहीं दिखता।

अपना नाम सूची में है या नहीं, सही तरीका क्या है

सबसे पहले राष्ट्रीय पोर्टल पर application ID से status देखना चाहिए। यहाँ commissioning की तारीख, सब्सिडी दावा और बैंक विवरण सही दिखना चाहिए।इसके बाद अपने राज्य की DISCOM वेबसाइट पर जारी लाभार्थी सूची से मिलान करना ज़रूरी है। कई बार सिस्टम लग चुका होता है, लेकिन किसी एक रिपोर्ट के अपडेट न होने से भुगतान रुका रहता है।

किन घरों को अभी रुककर सोचना चाहिए

हर किसी के लिए तुरंत सोलर लगवाना सही फैसला नहीं होता। जहाँ छत पर ज़्यादा छाया है, मालिकाना स्थिति साफ नहीं है या मीटर की श्रेणी गलत है, वहाँ पहले सुधार करना ज़रूरी है। ऐसे मामलों में जल्दबाज़ी नुकसान कर सकती है।

आगे किन घरों को जल्दी फायदा मिलने वाला है

दिसंबर–नवंबर के डेटा को देखने पर यह साफ दिखता है कि जिन घरों की बुनियादी तैयारी पहले से पूरी थी, वही इस योजना में तेज़ी से आगे बढ़ पाए। खास तौर पर ये बातें निर्णायक साबित हो रही हैं:

  • जिन घरों की छत साफ है और दिन के ज़्यादातर समय उस पर छाया नहीं पड़ती
  • जहाँ बिजली कनेक्शन, मीटर और बिल एक ही व्यक्ति के नाम पर साफ रिकॉर्ड के साथ मौजूद हैं
  • जिन परिवारों में कोई ऐसा सदस्य है जो पोर्टल पर status check कर सके और DISCOM या vendor से समय पर बात कर सके
  • जिन आवेदकों ने inspection, capacity finalisation और net-metering जैसे चरणों को टालने के बजाय समय पर पूरा किया

इन्हीं कारणों से ऐसे घरों का नाम नई लाभार्थी सूची में जल्दी दिखाई दे रहा है, जबकि बाकी आवेदन अभी भी प्रक्रिया के बीच में अटके हुए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q.क्या सिर्फ आवेदन करने से नाम सूची में आ जाता है?
नहीं। नाम तभी माना जाता है जब सिस्टम लगकर चालू हो जाए और उसकी रिपोर्ट दर्ज हो।

Q.क्या हर घर को पूरे 300 यूनिट मुफ्त मिलते हैं?
नहीं। यह सिस्टम की क्षमता और खपत पर निर्भर करता है।

Q.दिसंबर की सूची देखने का भरोसेमंद तरीका क्या है?
राष्ट्रीय पोर्टल पर status देखना और राज्य की DISCOM सूची से मिलान करना।

अब समझदारी वाला अगला कदम

दिसंबर की नई सूची एक तरह से आईना है। यह दिखाती है कि किसने प्रक्रिया को अंत तक पूरा किया और किसने सिर्फ शुरुआत की। अगर छत खाली है, बिजली का बिल लगातार आ रहा है और फिर भी फैसला टल रहा है, तो नुकसान किसी योजना का नहीं, बल्कि खुद का हो रहा है। सही तरीका यही है कि नियम पढ़े जाएँ, स्थिति समझी जाए और हर चरण पर सही समय पर कदम उठाया जाए।

अस्वीकरण

यह जानकारी सार्वजनिक सरकारी पोर्टलों और उपलब्ध नियमों पर आधारित है। यह वेबसाइट किसी भी सरकारी विभाग या बिजली वितरण कंपनी की आधिकारिक साइट नहीं है। योजना के नियम, प्रक्रिया और समय-सीमा समय-समय पर बदल सकती हैं। किसी भी आवेदन या निर्णय से पहले संबंधित आधिकारिक वेबसाइट या कार्यालय से जानकारी की पुष्टि करना आवश्यक है।

🔴 जरूरी जानकारी
यह जानकारी सरकारी वेबसाइटों और भरोसेमंद सार्वजनिक स्रोतों को देखकर आसान भाषा में समझाने के लिए लिखी गई है। यह वेबसाइट किसी भी सरकारी विभाग या सरकारी दफ्तर की आधिकारिक वेबसाइट नहीं है। किसी भी योजना, पैसा, लाभ या नियम से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले कृपया संबंधित सरकारी वेबसाइट पर जानकारी खुद से एक बार जरूर जांच लें।

Kamlesh Kumar

मेरा नाम कमलेश कुमार है और मेरा उम्र 22 वर्ष है।मैं ब्लॉगिंग करता हूँ और किसान से जुड़ी सरकारी अपडेट, सरकारी योजनाएँ और पोस्ट ऑफिस स्कीम की जानकारी आसान भाषा में लिखता हूँ। यहाँ दी गई जानकारी मैं सरकारी वेबसाइटों और भरोसेमंद सार्वजनिक स्रोतों को देखकर तैयार करता हूँ। ई-मेल: help@suchnamanch24x7.in

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