
कई लोगों ने यह झेला है कि पार्सल “पास वाली गली” में चला गया, एम्बुलेंस को फोन पर बार-बार रास्ता समझाना पड़ा, या KYC के समय पता verify ही नहीं हो पाया। काग़ज़ों पर पता सही होता है, लेकिन ज़मीन पर वही पता सबसे बड़ा सिरदर्द बन जाता है। खासकर गाँव, नई कॉलोनी, या बड़ी सोसायटी में यह दिक्कत और बढ़ जाती है।
यहीं से India Post का नया सिस्टम DIGIPIN सामने आता है। इसका मकसद कोई नया झंझट जोड़ना नहीं, बल्कि वही पुरानी समस्या खत्म करना है—गलत लोकेशन, अधूरा पता और “थोड़ा आगे, फिर बाएँ” वाला confusion। DIGIPIN को ऐसे डिजाइन किया गया है कि घर, दुकान या खेत की exact जगह डिजिटल कोड में बदल जाए। न अनुमान, न कॉल पर रास्ता समझाने की जरूरत। सीधा वही जगह, जहाँ पहुँचना है।
DIGIPIN असल में है क्या और यह कैसे काम करता है
DIGIPIN पूरे देश को छोटे-छोटे 4 मीटर × 4 मीटर के ग्रिड में बाँट देता है। हर ग्रिड का एक 10-character alphanumeric code होता है, जो सीधे GPS coordinates से बनता है। यानी हर कोड एक ही exact जगह को दिखाता है, किसी बड़े इलाके को नहीं।पुराना 6-digit PIN code एक पूरे एरिया को दिखाता था—कभी-कभी कई किलोमीटर में फैला हुआ। वहीं DIGIPIN सिर्फ उसी spot को पहचानता है, जहाँ खड़ा होकर कोड निकाला गया हो।
यही वजह है कि delivery या verification में गलती की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है। यह सिस्टम IIT Hyderabad और ISRO-NRSC की तकनीकी मदद से बनाया गया है और इसे National Geospatial Policy 2022 के तहत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह देखा जा रहा है। मतलब आगे चलकर सरकारी और private दोनों तरह की सेवाएँ इसी आधार पर काम कर सकती हैं।
PIN Code और DIGIPIN में लोग कहाँ गलती समझ लेते हैं
सबसे आम confusion यही है कि क्या DIGIPIN, पुराने PIN code को खत्म कर देगा। अभी ऐसा नहीं है। दोनों का काम अलग-अलग है और दोनों साथ-साथ चलेंगे। PIN code अब भी sorting और broad area पहचान के लिए जरूरी रहेगा। DIGIPIN का रोल वहाँ शुरू होता है, जहाँ exact location चाहिए। सरल भाषा में समझें तो PIN code यह बताता है कि इलाका कौन-सा है, और DIGIPIN यह तय करता है कि उसी इलाके में सही जगह कौन-सी है।
इसका फायदा यह होगा कि पोस्ट ऑफिस, कुरियर कंपनी या सरकारी विभाग को guessing नहीं करनी पड़ेगी। address साफ होगा, process तेज होगा और शिकायतें कम होंगी। यही वजह है कि इसे replacement नहीं, बल्कि support system की तरह पेश किया गया है।
अपना DIGIPIN कैसे निकालें और कहाँ काम आएगा
DIGIPIN निकालने के लिए किसी दफ्तर जाने या फॉर्म भरने की जरूरत नहीं है। India Post के official portal पर जाकर यह काम 2 मिनट में हो जाता है। लोकेशन access देने पर सिस्टम खुद-ब-खुद code दिखा देता है। चाहें तो address या latitude-longitude डालकर भी कोड निकाला जा सकता है।
📌 यहाँ screenshot use करें
Screenshot: “Know Your DIGIPIN” page
🔗 Official portal: https://www.indiapost.gov.in
यही नहीं, उसी जगह “Know Your PIN Code” का option भी मिलता है। इससे किसी भी इलाके का सही PIN confirm करना आसान हो जाता है, जो पहले कई बार गलत निकल आता था। यह सिस्टम open technology पर बना है। इसका मतलब है कि आगे चलकर e-commerce, courier, fintech apps इसे अपने सिस्टम में जोड़ सकते हैं। इससे address fill करना, KYC verify करना और delivery track करना—तीनों आसान हो जाते हैं।
असली फर्क कहाँ दिखेगा: डिलीवरी, इमरजेंसी और सरकारी सेवाएँ
DIGIPIN का सबसे बड़ा असर last-mile delivery पर दिखेगा। बड़ी सोसायटी में सही wing, गाँव में सही बस्ती और खेत-खलिहान तक पहुँच—यह सब पहले अनुमान पर चलता था। अब सिस्टम खुद location बता देगा। इमरजेंसी services के लिए यह और भी जरूरी है। ambulance या fire service को phone पर रास्ता समझाने की जगह सीधे exact spot मिल सकता है।
यही concept है Address-as-a-Service, जहाँ address खुद एक verified digital data बन जाता है। एक practical example सामने आया है: एक गाँव में दो बस्तियों के नाम एक जैसे थे। पोस्ट अक्सर दूसरी बस्ती में चली जाती थी। DIGIPIN share करने के बाद postman सीधे सही gate तक पहुँचा, बिना बार-बार कॉल किए। यही जमीन पर दिखने वाला फर्क है।
Privacy का डर और इसका practical जवाब
कई लोग पूछते हैं कि क्या इससे privacy खतरे में पड़ेगी। सरकारी बयान साफ है कि DIGIPIN consent-based सिस्टम है। बिना अनुमति किसी का data share नहीं किया जाता। यह infrastructure public feedback से लगातार सुधारा जा रहा है। दूसरा सवाल आता है—बुजुर्ग या फीचर फोन users क्या करेंगे? इसी वजह से PIN code parallel रखा गया है। DIGIPIN optional है, लेकिन जहाँ जरूरत है वहाँ बहुत काम का है। India Post ने feedback option भी दिया है, ताकि गलत mapping या boundary issue report किए जा सकें। जैसे-जैसे लोग इस्तेमाल करेंगे, accuracy अपने-आप बेहतर होती जाएगी।
FAQ: वही सवाल जो लोग सच में खोजते हैं
Q.DIGIPIN क्या mandatory है?
नहीं। अभी यह optional है और PIN code के साथ-साथ चलता है।
Q.क्या DIGIPIN बदल सकता है?
अगर location वही है तो code वही रहेगा। जगह बदली तो code भी बदलेगा।
Q.KYC में DIGIPIN इस्तेमाल होगा?
भविष्य में banks और fintech इसे address verification के लिए अपना सकते हैं।
Q.क्या इसके लिए कोई फीस लगती है?
नहीं, DIGIPIN निकालना पूरी तरह free है।
आख़िरी बात: अपनाने में देर करेंगे तो नुकसान किसका?
DIGIPIN कोई दूर की तकनीक नहीं है। यह उसी समस्या का हल है, जिससे लोग रोज जूझते हैं—गलत delivery, delay और confusion। आज इसे जानना और समझना आगे चलकर समय, पैसा और परेशानी—तीनों बचा सकता है। शुरुआत छोटी है, लेकिन असर बड़ा है।
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