Tex-RAMPS स्कीम 2025: टेक्सटाइल सेक्टर में काम करने वालों के लिए सरकार दे रही हैं 5 करोड़ रुपये का बड़ा लाभ

Published on. November 29, 2025

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दोस्तों, अगर आप Tex-RAMPS 2025 स्कीम के बारे में सुन रहे हैं, तो इसे ऐसे समझें। सरकार टेक्सटाइल सेक्टर में कुल 300 करोड़ रुपये लगाने वाली है। सीधे सीधे आपको 5 करोड़ रुपये नहीं मिलेंगे, लेकिन रिसर्च, डेटा और स्टार्टअप्स के ज़रिए कामगारों के लिए कमाई के बेहतर मौके बनेगे। मतलब, बड़े प्रोजेक्ट्स और लैब्स को सपोर्ट मिलेगा और इससे हर क्लस्टर में करोड़ों का असर आम कामगारों तक पहुंचेगा।

Tex-RAMPS 2025 को आसान भाषा में समझें

Tex-RAMPS का पूरा नाम है “Textiles Focused Research, Assessment, Monitoring, Planning and Start-up”। इसे 2025-26 से 2030-31 तक के लिए मंजूरी मिली है और यह Central Sector Scheme है। यानी सरकार खुद पूरे 305 करोड़ रुपये खर्च करेगी, किसी राज्य से पैसा नहीं लिया जाएगा। इसका मकसद साफ है: टेक्सटाइल सेक्टर को सिर्फ सस्ता कपड़ा बनाने वाला क्षेत्र नहीं रहने देना, बल्कि इसे स्मार्ट टेक्सटाइल और सस्टेनेबल फैब्रिक की तरफ ले जाना।

असल में कई सालों से टेक्सटाइल सेक्टर में रिसर्च और डेटा का काम बिखरा हुआ था। नीति भी आधी-अधूरी बनती थी और फैक्ट्रियां पूरी क्षमता पर नहीं चल पाती थीं। अब Tex-RAMPS के तहत रिसर्च, डेटा, स्टार्टअप और राज्य स्तर की प्लानिंग सब एक साथ आएंगे। इससे नए प्रोजेक्ट्स में इनोवेशन आएगा और कामगारों के लिए लंबे समय तक कमाई के नए रास्ते खुलेंगे।

मान लीजिए किसी छोटे शहर की मिल में मालिक को सही डेटा ही नहीं कि मार्केट में क्या ट्रेंड चल रहा, तो वो बस पुराने डिजाइन मारता रहेगा, मार्जिन पतला होता जाएगा। अगर उसके शहर में Tex-RAMPS के तहत डेटा और रिसर्च वाला प्रोजेक्ट शुरू हो जाए, तो वही मिल नई प्रोडक्ट लाइन पकड़ सकती है और वहीं काम करने वाले लोग ज्यादा सुरक्षित नौकरी और अच्छा पैस मिल सकता है।  

5 करोड़ रुपये वाली बात को सही angle से देखें

अधिकारिक तौर पर Tex-RAMPS की कुल राशि 305 करोड़ है, जो अलग-अलग कॉम्पोनेंट्स – रिसर्च, डेटा सिस्टम, स्टार्टअप सपोर्ट, वर्कशॉप, स्टेट प्लानिंग वगैरह पर टूट कर खर्च होगी।लेकिन जहां “5 करोड़ जैसा बड़ा लाभ” की बात आती है, वहां असल खेल project size का है, न कि किसी एक व्यक्ति के खाते का।  

एक हाई-वैल्यू रिसर्च प्रोजेक्ट या सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस की कॉस्ट आसानी से 3–5 करोड़ रुपये तक हो सकती है। इसमें लैब सेटअप, हाई-टेक मशीनें, टेस्टिंग इक्विपमेंट, सॉफ्टवेयर और स्किल्ड रिसर्चर्स की टीम सब शामिल है। यह पैसा सरकार और इंडस्ट्री की साझेदारी से आएगा, और इसका आउटपुट नई टेक्नोलॉजी या प्रोडक्ट होगा, जो आगे चलकर हजारों कामगारों की कमाई बढ़ाने में मदद करेगा।

वहीं, स्टार्टअप इनक्यूबेटर और हैकाथॉन के जरिए छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स को भी फंड मिलेगा। किसी को कुछ लाख, किसी को करोड़ के आस-पास। कुल मिलाकर, एक क्लस्टर में करोड़ों की वैल्यू का एक पूरा इकोसिस्टम तैयार हो सकता है, जिससे कामगार और उद्योग दोनों का फायदा होगा।

एक रियल example जैसा सोचिए – मान लीजिए लुधियाना में “सस्टेनेबल स्पोर्ट्सवियर” पर कोई बड़ा प्रोजेक्ट Tex-RAMPS के तहत मंजूर हो, जिसकी कुल कॉस्ट 5 करोड़ हो। इसमें नई मशीन आएगी, टेस्टिंग लैब बनेगी, डिजाइन टीम रखी जाएगी, और इंडस्ट्री के पार्टनर मिलकर प्रोडक्ट को मार्केट तक ले जाएंगे। इसमें सीधे-सीधे 50-70 लोगों को काम मिल सकता है और कई सप्लायर वर्कशॉप को भी ऑर्डर मिलेंगे। वो 5 करोड़ रुपये 50–100 परिवारों में धीरे-धीरे बंटकर पहुंचेगा – यही असली “बड़ा लाभ” है, जो ऊपर से एक लाइन में खबरों में दिखता नहीं।  

टेक्सटाइल में नौकरी करने वालों पर ये असर कैसे डालेगा?

सरकार की नजर में Tex-RAMPS सिर्फ रिसर्च पेपर छपवाने के लिए नहीं, बल्कि टेक्सटाइल सेक्टर को “फ्यूचर-प्रूफ” करने के लिए बनाया गया है – यानी जो वर्कर आज पावरलूम, प्रोसेस हाउस, गारमेंट फैक्ट्री, डिजाइन स्टूडियो या टेक्निकल टीम में काम कर रहे हैं, उनकी आने वाले सालों की नौकरी थोड़ी ज्यादा सुरक्षित हो सके।

स्कीम के कुछ सीधा असर ये हो सकते हैं:  

• रिसर्च और इनोवेशन से नई प्रोडक्ट लाइन बनेगी, जैसे स्मार्ट टेक्सटाइल, टेक्निकल फैब्रिक, सस्टेनेबल डेनिम, जिससे हाई-वैल्यू ऑर्डर आएंगे।

• Integrated Textiles Statistical System (ITSS) जैसे डेटा प्लेटफॉर्म से सरकार और इंडस्ट्री दोनों को पता चलेगा कि किस क्लस्टर में गिरावट आ रही है, कहां स्किल ट्रेनिंग या नई स्कीम की जरूरत है.

• स्टेट-लेवल प्लानिंग और वर्कशॉप के जरिए क्लस्टर में काम करने वालों को नई टेक्नोलॉजी पर ट्रेनिंग मिलेगी। इससे उनकी स्किल्स बेहतर होंगी और सैलरी की bargaining power भी बढ़ेगी, यानी वे अपनी कमाई बढ़ाने के लिए ज्यादा मजबूत स्थिति में होंगे।

मान लीजिए पानिपत का एक हैंडलूम वर्कर सालों से एक ही डिजाइन के थ्रो/ब्लैंकेट बनाते-बनाते थक चुका है, पर विकल्प नहीं दिखता। अगर वहां Tex-RAMPS के तहत कोई प्रोजेक्ट आता है जो होम-टेक्सटाइल को टूरिज्म, होटल या एक्सपोर्ट मार्केट से जोड़कर डिजाइन और पैकेजिंग अपग्रेड करे, तो उसी वर्कर की मेहनत अब ज्यादा रेट पर बिक सकती है। उसे अलग से 5 करोड़ तो नहीं मिलते, पर हर पीस पर 20–30 रुपया ज्यादा मिलना भी साल भर में एक छोटा “मिनी फंड” जैसा हो ही जाता है।  

स्टार्टअप, हैकाथॉन और नया जमाना वाला कपड़ा बिज़नेस

Tex-RAMPS की एक खास बात है जो आमतौर पर न्यूज हेडलाइन में कम दिखती है – वह है स्टार्टअप और इनोवेशन सपोर्ट वाला हिस्सा। स्कीम में साफ लिखा गया है कि टेक्सटाइल सेक्टर में इनक्यूबेटर, हैकाथॉन और इंडस्ट्री–अकादेमिया कोलैबोरेशन के जरिए हाई-वैल्यू स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया जाएगा। यानी छोटे और नए प्रोजेक्ट्स को फंड और गाइडेंस मिलेगा, ताकि वे जल्द से जल्द कामयाब होकर इंडस्ट्री में नए ट्रेंड सेट कर सकें।अब तक स्टार्टअप की बात होती है तो दिमाग सीधे ऐप, फूड डिलीवरी या फिनटेक पर चला जाता है, लेकिन यहां फोकस होगा –  

• रीसायकल्ड या सस्टेनेबल फैब्रिक वाले प्रोजेक्ट  

• सेंसर बेस्ड स्मार्ट कपड़े  

• AI या मशीन लर्निंग से फैब्रिक डिफेक्ट डिटेक्शन  

• सप्लाई चेन और इन्वेंटरी मैनेजमेंट के लिए टेक सॉल्यूशंस  

एक personal टाइप का example – अगर आप खुद किसी टेक्सटाइल क्लस्टर में हैं और डिजाइन या टेक्निकल बैकग्राउंड रखते हैं, तो दो–तीन दोस्तों के साथ मिलकर ऐसा आइडिया सोचा जा सकता है, जो किसी existing मिल की real problem सॉल्व करे (जैसे wastage कम करना, dyeing में पानी बचाना, या छोटा ऑर्डर भी profit में बन पाना)। फिर जैसे ही Ministry या कोई टेक्सटाइल इनक्यूबेटर Tex-RAMPS के तहत कॉल निकाले, आप अपने आइडिया को पिच कर सकते हैं। अगर वहां से सीड फंड, मेंटर और लैब का सपोर्ट मिला, तो कल वही छोटा आइडिया 5–10 करोड़ की कंपनी बन सकता है, जिसमें आप खुद मालिक और दूसरे आपके साथ काम करने वाले हों।  

कुछ जरूरी सवालों के छोटे जवाब

प्रश्न 1: क्या Tex-RAMPS के तहत किसी individual worker को 5 करोड़ रुपये तक की मदद मिलेगी?   नहीं, स्कीम individual worker को direct ग्रांट नहीं देती, 5 करोड़ जैसी रकम बड़े रिसर्च, लैब या स्टार्टअप प्रोजेक्ट लेवल पर समझना ज्यादा सही है। वर्कर को इसका indirect फायदा बेहतर टेक्नोलॉजी, ज्यादा ऑर्डर, स्किल अपग्रेड और stable नौकरी के रूप में दिखेगा।  

प्रश्न 2: कौन-कौन सी संस्थाएं इसके लिए प्रोजेक्ट भेज सकती हैं?  PIB और DD News की जानकारी के मुताबिक यूनिवर्सिटी, रिसर्च इंस्टीट्यूट, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्टेट-लेवल प्लानिंग यूनिट, इनक्यूबेटर और इंडस्ट्री–अकाडेमिया कॉन्सोर्टियम जैसी बॉडीज Tex-RAMPS के तहत प्रपोजल भेज सकेंगी।छोटे उद्यमी या वर्कर आमतौर पर इन्हीं प्रोजेक्ट्स के पार्टनर या बेनिफिशियरी के रूप में जुड़ते हैं।  

प्रश्न 3: ये स्कीम कब तक चलेगी और फंडिंग कब से शुरू होगी?   स्कीम 2025-26 से 2030-31 की अवधि के लिए मंजूर है और Finance Commission के अगले साइकिल के साथ लिंक की गई है।मतलब आने वाले छह साल में फेज़–वाइज प्रोजेक्ट सेलेक्शन, फंड रिलीज और आउटपुट देखने को मिलेंगे।  

Tex-RAMPS स्कीम 2025 को अगर ground से देखें, तो यह “आज ही पैसा मिल जाए” वाला प्रोग्राम नहीं, बल्कि अगले 5–6 साल में टेक्सटाइल सेक्टर का पूरा माइंडसेट बदलने की कोशिश है – कच्चा माल, मजदूरी और पुरानी मशीन से निकलकर रिसर्च, डेटा, इनोवेशन और स्टार्टअप की तरफ। जो लोग अभी से अपनी स्किल, टेक्नोलॉजी और understanding पर काम शुरू कर देंगे, वही कल इस 305 करोड़ की लहर से निकला असली 5 करोड़ वाला फायदा पकड़ पाएंगे, चाहे वो नौकरी में हों या अपने छोटे बिज़नेस में। 

इस योजना के तहत छोटे उद्योग और काम करने वाले लोग नए अवसर पा सकते हैं, जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और रोजगार सुरक्षित रहेगा।

🔴 जरूरी जानकारी
यह जानकारी सरकारी वेबसाइटों और भरोसेमंद सार्वजनिक स्रोतों को देखकर आसान भाषा में समझाने के लिए लिखी गई है। यह वेबसाइट किसी भी सरकारी विभाग या सरकारी दफ्तर की आधिकारिक वेबसाइट नहीं है। किसी भी योजना, पैसा, लाभ या नियम से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले कृपया संबंधित सरकारी वेबसाइट पर जानकारी खुद से एक बार जरूर जांच लें।

Kamlesh Kumar

मेरा नाम कमलेश कुमार है और मेरा उम्र 22 वर्ष है।मैं ब्लॉगिंग करता हूँ और किसान से जुड़ी सरकारी अपडेट, सरकारी योजनाएँ और पोस्ट ऑफिस स्कीम की जानकारी आसान भाषा में लिखता हूँ। यहाँ दी गई जानकारी मैं सरकारी वेबसाइटों और भरोसेमंद सार्वजनिक स्रोतों को देखकर तैयार करता हूँ। ई-मेल: help@suchnamanch24x7.in

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