SVAMITVA योजना: अब आपके गाँव की जमीन होगी आपके नाम — और बनाएं अपना property card आसानी से

Published on. December 6, 2025

सरकारी योजनाओं की नई अपडेट WhatsApp और Telegram से जुड़ें

दोस्तों SVAMITVA योजना की सबसे बड़ी खासियत यही है कि अब गाँव की आबादी वाली जमीन, जो सालों से बस “कब्ज़े” के नाम पर चल रहा था। अब उसका साफ‑साफ कागज़ आपके नाम से बन रहा है। इस कागज़ को ही आसान भाषा में आप अपना “रूरल प्रॉपर्टी कार्ड” या गाँव की जमीन का आधुनिक खसरा‑खतौनी समझ सकते हैं, जिस पर बैंक से लोन तक मिल सकता है।

गाँव की पुरानी जमीन का झंझट होगा खत्म

गाँव में अक्सर देखा होगा, घर आबादी के बीच है, बाउंड्री भी सालों से बनी है, पर कागज़ में नाम साफ नहीं दिखता या कोई न कोई रिश्तेदार आपत्ति करता रहता है। यही झंझट खत्म करने के लिए SVAMITVA योजना शुरू किया गया है ।जिसमें ड्रोन से पूरा गाँव ऊपर से नापा जाता है और हर घर का अलग‑अलग नक्शा तैयार होता है।

इस डेटा को गाँव की राजस्व टीम और सर्वे ऑफ इंडिया मिलकर वेरीफाई करती है, फिर उस प्लॉट के हिसाब से आपके नाम का रिकॉर्ड ऑफ राइट्स तैयार होता है। एक तरह से जो बात पहले “फलाँ के मकान के आगे से नाली गुजरती है” जैसी मुँहजबानी चलती थी, वो अब डिजिटल नक्शे और प्रॉपर्टी कार्ड पर साफ लाइन में दिखने लगती है।

मेरे अपने जिले के एक गाँव में तो यह देखा कि दो भाइयों में सालों से चलता आ रहा जमीन के लिए विवाद, अब ड्रोन मैपिंग के बाद पहली बार दोनों को साफ नक्शा दिखा, किसका कितना हिस्सा है – उसी दिन से कोर्ट‑कचहरी का मामला खत्म हो गया।

प्रॉपर्टी कार्ड में आपके नाम क्या‑क्या लिखा मिलेगा

बहुत लोग सोचते हैं कि “ये कार्ड होगा कैसा, इसमें लिखा क्या होगा?”, जबकि सच ये है कि यह एक तरह का मिनी‑खतौनी जैसा डॉक्यूमेंट होता है, जिसमें आपकी संपत्ति की डिटेल साफ‑साफ दर्ज रहती है।

आमतौर पर ऐसे कार्ड में इन तरह की बातें होती हैं:

  • मालिक का नाम, उसके पिता या पति का नाम और पूरा पता
  • प्लॉट नंबर, कुल एरिया और किस गाँव/मौजा में जमीन पड़ती है
  • जमीन पर अगर सरकार, की किसी एजेंसी से लिया गया लोन है तो उसकी एंट्री
  • अगर कोई मुकदमा या टैक्स, बकाया है तो उसकी बेसिक जानकारी भी दर्ज रहती है

सबसे ज़रूरी बात, कार्ड पर तहसील या संबंधित राजस्व अधिकारी की मुहर व सिग्नेचर होता है, जिससे बैंक और बाकी विभाग इसे वैध सरकारी रिकॉर्ड मानते हैं। कई गाँव वालों ने बताया कि पहले वही जमीन बस रहने के काम आती थी, अब इसी कार्ड की वजह से ओवरड्राफ्ट लोन लेना आसान हो गया है।

किसे मिलेगा आपका गाँव वाला ये प्रॉपर्टी कार्ड

SVAMITVA योजना का टारगेट सिर्फ वही लोग हैं जिनकी संपत्ति गाँव के आबादी वाले हिस्से में है, यानी जहाँ घर‑आँगन, दुकान या छोटी वर्कशॉप वगैरह बनी होती हैं। खेती की जमीन तो पहले से रेवेन्यू रिकॉर्ड में रहती है, यहाँ बात सिर्फ आबादी क्षेत्र की पक्की और कच्ची बस्तियों की हो रही है।

बेसिक रूप से इन बातों का ध्यान रखा जाता है:

  • आप गाँव के आबादी क्षेत्र में किसी घर या प्लॉट पर कब्जे में हों
  • आपका आधार कार्ड हो और मोबाइल नंबर आधार से लिंक्ड हो, ताकि डिजिटल रिकॉर्ड और SMS लिंक भेजा जा सके
  • उस गाँव का ड्रोन सर्वे SVAMITVA स्कीम के तहत पूरा हो चुका हो, तभी वहाँ कार्ड बन पाएगा

कई राज्यों में नियम ये भी है कि जो लोग 25 सितंबर 2018 या उसके बाद से उस आबादी भूमि पर रह रहे हैं, उन्हें ही स्वामित्व रिकॉर्ड जारी किया जाएगा, ताकि पुराने फर्जी क्लेम सामने न आएँ। और मेरे गाँव में भी कुछ लोगों ने नया घर बनाकर “पुराना हक” बताने की कोशिश की, लेकिन सर्वे की कट‑ऑफ डेट आने के बाद उनका दावा टिक नहीं पाया।

प्रॉपर्टी कार्ड बनाने और डाउनलोड करने की असली प्रक्रिया कैसी चलती है

ज़्यादातर लोग यही सोचते हैं कि “अब मुझे खुद फॉर्म भरना पड़ेगा क्या?”, जबकि असलियत थोड़ी अलग है। सबसे पहले तो ड्रोन से आपका गाँव मैप होता है, फिर सर्वे ऑफ इंडिया, राज्य का राजस्व विभाग और पंचायत मिलकर प्लॉट की सीमा फाइनल करते हैं।

उसके बाद जो लोग उस प्लॉट पर रहते हैं, उनकी पहचान, आधार और पुराने कागज़ों की मिलान करवाई जाती है, तभी जाकर आपके नाम का रूरल प्रॉपर्टी कार्ड तैयार होता है।कई राज्यों में पहले SMS के जरिए मोबाइल पर e‑property card का लिंक भेजा जाता है, जिसे आप डाउनलोड कर सकते हैं, फिर बाद में गाँव में कैंप लगाकर फिजिकल कार्ड भी बाँटे जाते हैं।

कुछ राज्यों में तो UMANG ऐप और SVAMITVA पोर्टल के ज़रिए भी प्रॉपर्टी कार्ड देखने/डाउनलोड करने का ऑप्शन दिया जा रहा है, बस शर्त ये है कि उस गाँव का डेटा पोर्टल पर अपलोड हो चुका हो। मेरे जानने वाले एक शिक्षक ने बताया कि पहले उन्हें बैंक में कई कागज़ दिखाने पड़ते थे, अब वही बैंक अधिकारी सीधे प्रॉपर्टी कार्ड देखकर चर्चा शुरू कर देते हैं कि “कितना लोन लेना है?”

गाँव की जमीन का कार्ड बन जाने से असल फायदा कहाँ दिखेगा

सरकार की भाषा में कहा जाए तो यह स्कीम ग्राम स्वराज और ग्रामीण आर्थिक बदलाव के लिए शुरू हुई है, लेकिन आम आदमी की भाषा में सीधी बात यह है कि अब आपके गाँव का घर भी बैंक के लिए “कागज़ पर मौजूद प्रॉपर्टी” बन जाता है।

इसके कुछ बड़े फायदे जमीन पर ऐसे दिख रहे हैं:

  • आप अपना प्रॉपर्टी कार्ड गिरवी रखकर बैंक से लोन लेने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं, कई राज्यों में कुछ बैंकों ने इसे स्वीकार करना शुरू भी कर दिया है
  • जमीन के छोटे‑छोटे झगड़े, “दीवार मेरी है या तेरी” वाली लड़ाइयाँ ड्रोन मैपिंग और कार्ड की वजह से काफी हद तक कम हो सकती हैं
  • गाँव की प्लानिंग, सड़क, नाली, सामुदायिक जगह तय करने में पंचायत और प्रशासन के पास अब सटीक GIS‑बेस्ड नक्शे होते हैं, जिससे मनमानी या दबंगई थोड़ी लगाम में आती है

मेरी राय में, ग्रामीण परिवारों के लिए यह स्कीम सीधा कैश नहीं देती, लेकिन उनकी सबसे कीमती संपत्ति – घर और जमीन – को आधिकारिक पहचान दिलाकर long‑term में बहुत बड़ा आर्थिक सहारा बन सकती है, बशर्ते लोग समय रहते अपना डेटा सही तरीके से वेरीफाई करवाएँ।

लोग अक्सर जहाँ कन्फ्यूज हो जाते हैं

कई गाँवों में यह गलतफहमी फैल जाती है कि SVAMITVA कार्ड मिलते ही सारी पुरानी रजिस्ट्री, खतौनी या बँटवारे की डीड बेकार हो जाएगी, जबकि ऐसा नहीं है। यह कार्ड उन रिकॉर्ड्स के साथ मिलकर आपका स्वामित्व और मजबूत करता है, उन्हें मिटाता नहीं है।

दूसरी दिक्कत यह दिखती है कि कुछ लोग सोचते हैं “कार्ड आ गया तो बैंक लोन तो पक्का मिल ही जाएगा”, पर बैंक अपनी क्रेडिट पॉलिसी, इनकम, CIBIL और बाकी दस्तावेज़ भी देखते हैं, सिर्फ कार्ड ही काफी नहीं होता।इसके अलावा, जिस गाँव में अभी ड्रोन सर्वे ही पूरा नहीं हुआ, वहाँ लोग किसी बिचौलिये के चक्कर में पड़कर “जल्दी कार्ड बनवाने” के नाम पर पैसे दे देते हैं, जबकि यह पूरा प्रोसेस सरकार और अधिकृत एजेंसियाँ ही कर सकती हैं, किसी निजी दलाल के पास इसका अधिकार नहीं है।

अगर आप सच में इस योजना का फायदा लेना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने ग्राम पंचायत, ब्लॉक ऑफिस या राज्य के SVAMITVA/पंचायती राज पोर्टल पर जाकर यह जानिए कि आपके गाँव का सर्वे किस स्टेज पर है, फिर जब कैंप या वेरीफिकेशन की सूचना आए तो खुद मौजूद रहकर अपना डेटा सही कराइए।

अक्सर लोग ऐसे सवाल जरूर पूछते हैं

प्रश्न 1: क्या SVAMITVA प्रॉपर्टी कार्ड से तुरंत बिना रुकावट लोन मिल जाता है?
जवाब: ये कार्ड आपकी जमीन का आधिकारिक स्वामित्व प्रमाण है, जिससे बैंक को यह भरोसा होता है कि संपत्ति रिकॉर्ड में साफ‑साफ आपके नाम है।लेकिन लोन मंजूरी में बैंक आपकी आय, क्रेडिट हिस्ट्री, बाकी डॉक्यूमेंट और अपनी पॉलिसी भी देखता है, इसलिए इसे “ऑटोमेटिक लोन पास” समझना गलती होगी।

प्रश्न 2: अगर गाँव में पहले से खतौनी और रजिस्ट्री है तो क्या ये योजना ज़रूरी है?
जवाब: खेती की जमीन के लिए खतौनी और रजिस्ट्री पहले से होती है, पर आबादी क्षेत्र के घर‑आँगन अक्सर पुराने रिकार्ड में ढंग से दर्ज नहीं होते या बहुत पुरानी एंट्री होती है। SVAMITVA की मदद से वही हिस्सा ड्रोन सर्वे से नापकर आधुनिक नक्शे और प्रॉपर्टी कार्ड में रिकॉर्ड होता है, जिससे आगे चलकर विवाद और कन्फ्यूजन कम होते हैं।

प्रश्न 3: क्या शहर या कस्बे में बने घरों को भी इस योजना में कार्ड मिल सकता है?
जवाब: फिलहाल यह योजना सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों के आबादी हिस्सों के लिए है, यानी जिन गाँवों को SVAMITVA के तहत चुना गया है। शहरों, नगर पंचायत या निगम क्षेत्र की प्रॉपर्टी के लिए अलग‑अलग राज्य के शहरी राजस्व और नगर निकाय वाले सिस्टम लागू होते हैं, वहाँ SVAMITVA कार्ड जारी नहीं किया जाता।

यही था इस आर्टिकल का अंतिम हिस्सा

इस योजना से गाँव की उस पुरानी आदत को बदलने की कोशिश है जहाँ “सीमा” बस लोगों की बातों पर टिकी रहती थी, कागज़ पर नहीं। अब वही सीमाएँ ड्रोन से नापी जा रही हैं, और नक्शे पर खींची जा रही हैं और आपके नाम के प्रॉपर्टी कार्ड में दर्ज हो रही हैं, ताकि आने वाली पीढ़ी को बार‑बार वही पुरानी लड़ाइयाँ न लड़नी पड़ें।

फिर भी ध्यान रहे, यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी तरह का कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं माना जा सकता। SVAMITVA या प्रॉपर्टी से जुड़े किसी भी बड़े निर्णय से पहले अपने राज्य की आधिकारिक वेबसाइट, ग्राम पंचायत, राजस्व विभाग या किसी प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह लेना ज़रूरी है, और किसी भी बिचौलिये या फर्जी लिंक पर भरोसा करना आपके लिए नुकसानदेह हो सकता है।

🔴 जरूरी जानकारी
यह जानकारी सरकारी वेबसाइटों और भरोसेमंद सार्वजनिक स्रोतों को देखकर आसान भाषा में समझाने के लिए लिखी गई है। यह वेबसाइट किसी भी सरकारी विभाग या सरकारी दफ्तर की आधिकारिक वेबसाइट नहीं है। किसी भी योजना, पैसा, लाभ या नियम से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले कृपया संबंधित सरकारी वेबसाइट पर जानकारी खुद से एक बार जरूर जांच लें।

Kamlesh Kumar

मेरा नाम कमलेश कुमार है और मेरा उम्र 22 वर्ष है।मैं ब्लॉगिंग करता हूँ और किसान से जुड़ी सरकारी अपडेट, सरकारी योजनाएँ और पोस्ट ऑफिस स्कीम की जानकारी आसान भाषा में लिखता हूँ। यहाँ दी गई जानकारी मैं सरकारी वेबसाइटों और भरोसेमंद सार्वजनिक स्रोतों को देखकर तैयार करता हूँ। ई-मेल: help@suchnamanch24x7.in

Leave a Comment