सरकारी नौकरी हो या प्राइवेट, ज्यादातर लोग चाहते हैं कि उनका पैसा सुरक्षित भी रहे और समय के साथ ठीक-ठाक बढ़े भी। बैंक FD एक आम विकल्प है, लेकिन कई मामलों में पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाएं बेहतर संतुलन देती हैं। जनवरी 2026 में सरकार ने कुछ पोस्ट ऑफिस स्कीम की ब्याज दरों को जारी रखा है, जो लंबी और मध्यम अवधि के निवेशकों के लिए उपयोगी मानी जा रही हैं।

अक्सर देखा जाता है कि निवेशक केवल बैंक विकल्पों पर ध्यान देते हैं और पोस्ट ऑफिस की योजनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि सही समय और अवधि के साथ इन योजनाओं में निवेश करने पर मैच्योरिटी पर निवेश से कहीं अधिक रकम तैयार हो सकती है। नीचे ऐसी तीन पोस्ट ऑफिस स्कीम की जानकारी दी गई है, जिनकी ब्याज दरें जनवरी 2026 में चर्चा में हैं।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड – लंबी अवधि का भरोसेमंद विकल्प
PPF यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड को लंबे समय से रिटायरमेंट प्लानिंग का मजबूत आधार माना जाता है। जनवरी 2026 में इसकी ब्याज दर 7.1% सालाना है, जो पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है। इस स्कीम की अवधि 15 साल की होती है और नियमित निवेश के साथ लंबी अवधि में अच्छा फंड तैयार किया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति हर महीने लगभग ₹5,000 का निवेश करता है, तो 15 साल की अवधि में कुल जमा राशि से काफी अधिक मैच्योरिटी अमाउंट बन सकता है। PPF की खास बात यह है कि इसमें निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी – तीनों पर टैक्स नहीं लगता। कई निवेशक यह समझते हैं कि इसमें बड़ी रकम एक साथ डालनी होती है, जबकि वास्तव में ₹500 सालाना से भी शुरुआत की जा सकती है।
PPF की मुख्य बातें:
- न्यूनतम निवेश: ₹500 सालाना
- अधिकतम निवेश: ₹1.5 लाख सालाना
- लॉक-इन पीरियड: 15 साल (5 साल बाद आंशिक निकासी संभव)
- ब्याज दर: 7.1% (जनवरी 2026)
- टैक्स छूट: निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी पूरी तरह टैक्स-फ्री
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट – मिडिल क्लास के लिए संतुलित विकल्प
NSC यानी नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट को मध्यम वर्ग के निवेशकों के बीच लोकप्रिय माना जाता है। इसमें वर्तमान में 7.7% सालाना ब्याज मिल रहा है और इसकी अवधि 5 साल की होती है। इस स्कीम में निवेश करने पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स लाभ भी मिलता है।
यदि कोई निवेशक ₹1 लाख NSC में लगाता है, तो 5 साल बाद उसे जमा राशि से काफी अधिक रकम मिल सकती है। NSC की एक खास सुविधा यह है कि इसे बैंक लोन के लिए कोलैटरल के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे आपात स्थिति में निवेश तोड़े बिना जरूरत का पैसा जुटाने का विकल्प मिलता है।
NSC के फायदे:
- मैच्योरिटी: 5 साल
- वर्तमान ब्याज: 7.7% सालाना
- न्यूनतम निवेश: ₹1,000 से शुरू
- सिक्योरिटी: सरकारी गारंटी के साथ
- निवेश सीमा: अधिकतम सीमा नहीं
सुकन्या समृद्धि योजना – बेटियों के भविष्य के लिए मजबूत आधार
यदि परिवार में 10 साल से कम उम्र की बेटी है, तो सुकन्या समृद्धि योजना एक महत्वपूर्ण विकल्प मानी जाती है। जनवरी 2026 में इसकी ब्याज दर 8.2% है, जो छोटी बचत योजनाओं में अपेक्षाकृत अधिक है। इसमें सालाना न्यूनतम ₹250 और अधिकतम ₹1.5 लाख तक निवेश किया जा सकता है।
इस योजना में 15 साल तक पैसा जमा किया जाता है और अकाउंट 21 साल में मैच्योर होता है। नियमित निवेश और मौजूदा ब्याज दर के आधार पर मैच्योरिटी पर जमा राशि से काफी बड़ी रकम तैयार हो सकती है, जो बेटी की पढ़ाई या भविष्य की जरूरतों में सहायक हो सकती है। इस योजना में भी निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी पूरी तरह टैक्स-फ्री मानी जाती है।
सुकन्या समृद्धि योजना की शर्तें:
- बेटी की उम्र: 10 साल से कम
- ब्याज दर: 8.2% (जनवरी 2026)
- अकाउंट की संख्या: एक परिवार में अधिकतम 2 बेटियों के लिए
- आंशिक निकासी: 18 साल की उम्र के बाद 50% तक
- टैक्स छूट: धारा 80C + ब्याज और मैच्योरिटी टैक्स-फ्री
कौन-सी स्कीम आपके लिए बेहतर हो सकती है?
हर निवेशक की जरूरत अलग होती है। लंबी अवधि और रिटायरमेंट लक्ष्य के लिए PPF को उपयुक्त माना जाता है। यदि 5 साल की अवधि में टैक्स बचत के साथ संतुलित रिटर्न चाहिए, तो NSC एक विकल्प हो सकता है। वहीं, बेटियों के भविष्य की योजना बनाने के लिए सुकन्या समृद्धि योजना पर ध्यान दिया जाता है।
वित्तीय विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं कि केवल एक विकल्प पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग स्कीम में निवेश करके जोखिम को संतुलित किया जाए। बैंक FD की तुलना में ये योजनाएं टैक्स और ब्याज के मामले में बेहतर संतुलन दे सकती हैं।
निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
पोस्ट ऑफिस की योजनाएं आम तौर पर लंबी अवधि के लिए होती हैं, इसलिए निवेश से पहले शर्तें समझना जरूरी होता है। बीच में पैसा निकालने पर पेनल्टी या शर्तें लागू हो सकती हैं। ब्याज दरें हर तिमाही घोषित होती हैं, लेकिन खाता खोलते समय लागू दर ही उस निवेश पर प्रभावी रहती है। नॉमिनी का नाम दर्ज कराना भी जरूरी माना जाता है।
ध्यान देने योग्य बिंदु:
- प्री-मैच्योर क्लोजर पर पेनल्टी संभव
- ब्याज दरें तिमाही आधार पर बदल सकती हैं
- KYC दस्तावेज अपडेट रखें
- अलग-अलग स्कीम में निवेश से संतुलन बनाएं
- मैच्योरिटी तारीख का ध्यान रखें
सामान्य प्रश्न
Q1. क्या पोस्ट ऑफिस की स्कीम में ऑनलाइन निवेश किया जा सकता है?
कुछ स्कीम में ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है। PPF और RD अकाउंट India Post Payment Bank के जरिए खोले जा सकते हैं, जबकि NSC और सुकन्या समृद्धि के लिए आम तौर पर पोस्ट ऑफिस जाना होता है।
Q2. क्या इन स्कीम में निवेश पर लोन मिल सकता है?
PPF में 3 साल बाद बैलेंस के एक हिस्से पर लोन सुविधा मिल सकती है। NSC को बैंक लोन के लिए कोलैटरल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
Q3. क्या ब्याज दर बदलने से पुराने निवेशकों पर असर पड़ता है?
नहीं। खाता खोलते समय जो ब्याज दर लागू होती है, वही उस निवेश की अवधि तक प्रभावी रहती है। नई दरें केवल नए निवेश पर लागू होती हैं।
अंत में कुछ खास बातें
पोस्ट ऑफिस की ये तीनों स्कीम उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जाती हैं, जो सुरक्षित निवेश के साथ स्थिर रिटर्न चाहते हैं। PPF लंबी अवधि के लिए, NSC मध्यम अवधि के लिए और सुकन्या समृद्धि योजना बेटियों के भविष्य की योजना के लिए उपयुक्त विकल्प हो सकती हैं। जनवरी 2026 में इनकी ब्याज दरें स्थिर और आकर्षक बनी हुई हैं, और सरकारी गारंटी के कारण जोखिम को अपेक्षाकृत कम माना जाता है।
Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। निवेश करने से पहले नजदीकी पोस्ट ऑफिस या योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना आवश्यक है। ब्याज दरें समय-समय पर बदल सकती हैं, इसलिए निवेश से पहले वर्तमान दरों की पुष्टि करें। किसी भी वित्तीय निर्णय की जिम्मेदारी निवेशक की स्वयं की होगी।










