फसल बेचते समय होने वाली 5 गलतियाँ, जिनसे किसान को सीधा नुकसान होता है और सही दाम नहीं मिल पाता

Published on. January 16, 2026

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खेती में मेहनत तो किसान पूरे मन से करता है, लेकिन जब फसल बेचने का समय आता है, तभी सबसे ज़्यादा नुकसान होने की आशंका रहती है। फसल बेचते समय होने वाली 5 गलतियाँ ही अक्सर इस नुकसान की सबसे बड़ी वजह बन जाती हैं। कई किसान यह कहते सुने जाते हैं कि “फसल तो ठीक थी, फिर भी दाम कम मिले।” असल परेशानी यह है कि खेत में की गई मेहनत और मंडी में मिलने वाला पैसा, दोनों के बीच एक बड़ा फर्क रह जाता है।

यह फर्क अक्सर किसी बड़ी गलती से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी लापरवाहियों से पैदा होता है। किसान सोचता है कि जो व्यापारी कह रहा है वही सही होगा, या फिर समय की कमी में जल्दी फैसला ले लेता है। यहीं से नुकसान शुरू होता है। अगर इन बातों को पहले समझ लिया जाए, तो फसल बेचते समय नुकसान से बचा जा सकता है।

पहली गलती: बाजार का सही भाव जाने बिना फसल बेच देना

कई किसान फसल कटते ही उसे बेचने की जल्दी में रहते हैं। उन्हें लगता है कि देर करने से फसल खराब हो जाएगी या भाव गिर जाएगा। इसी डर में वे बिना जानकारी लिए ही नज़दीकी व्यापारी को फसल दे देते हैं। बाद में पता चलता है कि उसी दिन पास की दूसरी मंडी में दाम ज़्यादा थे। सही तरीका यह है कि फसल बेचने से पहले थोड़ा समय निकालकर बाजार की जानकारी ली जाए। यह जानकारी किसान अपने इलाके की मंडी से, किसान मित्र से या सरकारी पोर्टल से ले सकता है। अगर किसान यह काम एक-दो दिन पहले कर ले, तो उसे यह अंदाज़ा हो जाता है कि फसल कहाँ बेचनी ज़्यादा फायदेमंद रहेगी। यह छोटा-सा कदम कई बार बड़ा नुकसान बचा देता है।

दूसरी गलती: नमी और सफाई को हल्के में लेना

अक्सर किसान फसल को पूरी तरह सुखाए बिना मंडी ले जाते हैं। बाहर से फसल ठीक दिखती है, लेकिन जब व्यापारी नमी की बात करता है तो किसान के पास कोई जवाब नहीं होता। नतीजा यह होता है कि दाम कम कर दिए जाते हैं। फसल बेचने से पहले उसे ठीक से सुखाना और साफ करना बहुत ज़रूरी है। अगर गेहूँ, धान या चना जैसी फसल में नमी ज़्यादा हो, तो व्यापारी उसी आधार पर कटौती करता है। कई किसान बाद में समझते हैं कि थोड़ी देर और सुखा लेते तो पूरा दाम मिल सकता था। इसलिए यह काम मंडी जाने से पहले ही कर लेना चाहिए।

तीसरी गलती: तौल के समय ध्यान न देना

तौल के वक्त किसान अक्सर लापरवाह हो जाते हैं। कोई मोबाइल देखने लगता है, कोई दूर खड़ा रहता है। इसी दौरान वजन में गड़बड़ी हो सकती है। कई जगहों पर बोरे का वजन ज़्यादा काट लिया जाता है या मशीन सही नहीं होती। अगर किसान खुद तौल के समय सामने खड़ा रहे और हर बोरी की तौल पर ध्यान दे, तो इस नुकसान से बचा जा सकता है। तौल में की गई थोड़ी-सी गड़बड़ी पूरे ट्रक की फसल में बड़ा नुकसान बना देती है।

चौथी गलती: MSP और सरकारी खरीद की जानकारी न रखना

बहुत से किसान यह नहीं जानते कि उनकी फसल सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीदी जा सकती है या नहीं। जानकारी के अभाव में वे सीधे निजी व्यापारी को फसल बेच देते हैं। बाद में पता चलता है कि अगर सरकारी केंद्र पर जाते, तो तय दाम मिल सकता था। इसलिए किसान को यह जानना ज़रूरी है कि उसकी फसल MSP के दायरे में आती है या नहीं। यह जानकारी कृषि विभाग या सरकारी वेबसाइट से आसानी से मिल सकती है। सही समय पर जानकारी लेने से किसान सुरक्षित दाम पा सकता है।

पाँचवीं गलती: भुगतान का पक्का सबूत न लेना

कई बार व्यापारी कह देता है कि पैसा बाद में खाते में डाल देगा। किसान भरोसा कर लेता है, लेकिन भुगतान देर से आता है या पूरा नहीं आता। जब कोई रसीद या लिखित सबूत नहीं होता, तब किसान के पास शिकायत का रास्ता भी नहीं बचता। फसल बेचते समय यह ज़रूरी है कि भुगतान की रसीद ली जाए या डिजिटल भुगतान का रिकॉर्ड रखा जाए। यही रिकॉर्ड बाद में किसान के काम आता है।

एक सच्चा उदाहरण

उत्तर प्रदेश के एक किसान ने धान की फसल बेचते समय बाजार भाव नहीं देखा और जल्दी में फसल बेच दी। उसी मंडी में अगले दिन भाव बढ़ गया। अगर वह एक दिन रुक जाता, तो प्रति क्विंटल ज़्यादा दाम मिल सकता था। यह नुकसान खेती का नहीं, जानकारी की कमी का था।

FAQ (लोग जो सच में पूछते हैं)

Q. क्या हर किसान को MSP मिलता है?
नहीं, MSP उन्हीं फसलों पर मिलता है जिनकी सरकारी खरीद होती है।

Q. अगर व्यापारी पैसा रोक ले तो क्या करें?
मंडी समिति या कृषि विभाग में शिकायत की जा सकती है, बशर्ते रसीद हो।

जानकारी का स्रोत:
यह लेख सरकारी कृषि पोर्टल, कृषि विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारियों पर आधारित है। फसल बेचने से पहले अपने क्षेत्र की स्थानीय मंडी और संबंधित सरकारी वेबसाइट से ताज़ा नियम व दरों की पुष्टि करना आवश्यक है, क्योंकि समय और राज्य के अनुसार इनमें बदलाव हो सकता है।
🔗 https://agriwelfare.gov.in

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। फसल बिक्री से जुड़े नियम और दाम समय व राज्य के अनुसार बदल सकते हैं। किसी भी निर्णय से पहले आधिकारिक जानकारी की पुष्टि ज़रूरी है।

🔴 जरूरी जानकारी
यह जानकारी सरकारी वेबसाइटों और भरोसेमंद सार्वजनिक स्रोतों को देखकर आसान भाषा में समझाने के लिए लिखी गई है। यह वेबसाइट किसी भी सरकारी विभाग या सरकारी दफ्तर की आधिकारिक वेबसाइट नहीं है। किसी भी योजना, पैसा, लाभ या नियम से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले कृपया संबंधित सरकारी वेबसाइट पर जानकारी खुद से एक बार जरूर जांच लें।

Kamlesh Kumar

मेरा नाम कमलेश कुमार है और मेरा उम्र 22 वर्ष है।मैं ब्लॉगिंग करता हूँ और किसान से जुड़ी सरकारी अपडेट, सरकारी योजनाएँ और पोस्ट ऑफिस स्कीम की जानकारी आसान भाषा में लिखता हूँ। यहाँ दी गई जानकारी मैं सरकारी वेबसाइटों और भरोसेमंद सार्वजनिक स्रोतों को देखकर तैयार करता हूँ। ई-मेल: help@suchnamanch24x7.in

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