उत्तर प्रदेश में खेती में रासायनिक खाद और दवाओं की लागत हर साल बढ़ती जा रही है। यूपी के कई किसान अब जैविक खेती की तरफ जाना चाहते हैं, लेकिन शुरुआत में खर्च और सही जानकारी की कमी उन्हें रोक देती है। बीज, खाद, सर्टिफिकेशन और बाजार तक पहुंच — हर कदम पर सवाल खड़े हो जाते हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने Organic Farming Subsidy Yojana को बढ़ावा दिया है।

योजना का मकसद सिर्फ खेती का तरीका बदलना नहीं, बल्कि किसान को नुकसान से बचाते हुए धीरे-धीरे सुरक्षित विकल्प देना है। यूपी के कई जिलों में देखा गया है कि किसान सही समय पर आवेदन नहीं कर पाते या आधी-अधूरी जानकारी के कारण उनका पैसा अटक जाता है। इस स्थिति में योजना का फायदा कागजों तक सीमित रह जाता है। यह पेज उस स्थिति से बचाने के लिए है, ताकि पढ़ने वाला किसान यह समझ सके कि कब, कहां और कैसे कदम उठाने हैं और किस जगह गलती करने से सीधा नुकसान होता है।
Organic Farming Subsidy Yojana 2026 क्या है और इसका मकसद क्या है
Organic Farming Subsidy Yojana केंद्र और राज्य सरकारों के जरिए चलाई जाने वाली सहायता योजनाओं का हिस्सा है। इसके तहत रासायनिक खेती छोड़कर जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को आर्थिक मदद दी जाती है, ताकि शुरुआती खर्च का दबाव कम हो। जैविक खेती में पहले 2–3 साल सबसे मुश्किल होते हैं। पैदावार पूरी तरह स्थिर नहीं होती, जबकि लागत सामने से आती रहती है। सरकार इसी गैप को भरने के लिए सब्सिडी देती है।
योजना का मकसद केवल पैसा देना नहीं है। मिट्टी की सेहत, पानी की गुणवत्ता और फसल की लंबे समय तक टिकाऊ व्यवस्था भी इसके पीछे का कारण है। इसलिए सब्सिडी अक्सर सीधे बैंक खाते में नहीं, बल्कि तय खर्चों के हिसाब से दी जाती है। कई राज्यों में यह योजना अलग-अलग नाम से चलती है, लेकिन आधार वही रहता है — जैविक खेती को सुरक्षित बनाना।
₹50,000 तक सब्सिडी कैसे और किस आधार पर मिलती है
सब्सिडी की राशि एक समान नहीं होती। यह किसान की जमीन, फसल के प्रकार और राज्य की नीति पर निर्भर करती है। आम तौर पर 1 हेक्टेयर तक की खेती पर ₹30,000 से ₹50,000 तक सहायता देखी गई है। यह पैसा सीधे नकद नहीं मिलता। इसका उपयोग मुख्य रूप से इन खर्चों में माना जाता है:
- जैविक खाद और इनपुट
- वर्मी कम्पोस्ट या गोबर गैस यूनिट
- जैविक सर्टिफिकेशन प्रक्रिया
- प्रशिक्षण और निरीक्षण खर्च
अगर कोई किसान बिना पंजीकरण या सर्टिफिकेशन के खेती शुरू कर देता है, तो बाद में सब्सिडी का दावा करना मुश्किल हो जाता है। यही सबसे आम गलती है। सही तरीका यह है कि खेती बदलने से पहले ही संबंधित विभाग या पोर्टल पर आवेदन किया जाए, ताकि हर खर्च रिकॉर्ड में रहे।
कौन किसान पात्र होता है और किन बातों पर ध्यान जरूरी है
इस योजना का लाभ वही किसान ले सकता है, जो जमीन का वास्तविक मालिक या वैध खेती करने वाला हो। पट्टे पर खेती करने वालों के लिए नियम राज्य के अनुसार अलग हो सकते हैं। जैविक खेती में पहले से रासायनिक खाद का उपयोग बंद करना जरूरी होता है। कई किसान सोचते हैं कि बीच-बीच में दवा चलाने से फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन निरीक्षण के समय यही बात आवेदन रद्द करवा देती है।
ध्यान रखने वाली जरूरी बातें:
- जमीन का रिकॉर्ड अपडेट होना चाहिए
- बैंक खाता आधार से जुड़ा होना चाहिए
- पहले से किसी दूसरी समान सब्सिडी का डुप्लिकेट लाभ न लिया गया हो
अगर इन शर्तों में एक भी कमी रह गई, तो आवेदन आगे बढ़ने से पहले ही रुक जाता है।
आवेदन प्रक्रिया: कब, कहां और कैसे करना सही रहता है
आवेदन की प्रक्रिया आम तौर पर राज्य कृषि विभाग या उससे जुड़े पोर्टल के माध्यम से होती है। कुछ राज्यों में यह सुविधा सीधे ब्लॉक या जिला कृषि कार्यालय से मिलती है। आवेदन का सही समय फसल चक्र से जुड़ा होता है। अगर देर हो गई, तो उसी साल की सब्सिडी हाथ से निकल सकती है।

समाधान यही है कि:
- फसल योजना पहले तय की जाए
- आवेदन खेती शुरू होने से पहले किया जाए
- हर दस्तावेज स्कैन करके सुरक्षित रखा जाए
देरी करने पर नुकसान यह होता है कि किसान पूरा खर्च खुद उठाता है और बाद में केवल आश्वासन ही बचता है।
ग्राउंड लेवल उदाहरण: सही समय पर फैसला क्यों जरूरी है
मध्य प्रदेश के एक किसान ने बिना पंजीकरण जैविक खेती शुरू की। पहले साल खर्च खुद उठाया और बाद में आवेदन किया। निरीक्षण में पुराने रिकॉर्ड न मिलने के कारण सब्सिडी स्वीकृत नहीं हुई। इसके उलट, उसी गांव के दूसरे किसान ने पहले पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया, प्रशिक्षण लिया और फिर खेती बदली। शुरुआती लागत का बड़ा हिस्सा सब्सिडी से कवर हो गया। फर्क सिर्फ एक फैसले का था — कब आवेदन किया गया। यही फर्क आगे चलकर नुकसान या बचत तय करता है।
FAQ: लोग सबसे ज्यादा क्या पूछते हैं
प्रश्न: क्या सब्सिडी हर साल मिलती है?
उत्तर: अधिकतर योजनाओं में 2–3 साल तक सहायता का प्रावधान होता है, लेकिन राशि घट-बढ़ सकती है।
प्रश्न: क्या सब्सिडी सीधे खाते में आती है?
उत्तर: कुछ मामलों में आती है, लेकिन ज्यादातर खर्च-आधारित भुगतान होता है।
प्रश्न: क्या छोटे किसान भी आवेदन कर सकते हैं?
उत्तर: हां, कई राज्यों में छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाती है।
प्रश्न: अगर बीच में खेती छोड़ दी तो क्या होगा?
उत्तर: ऐसी स्थिति में आगे की सब्सिडी रोकी जा सकती है।
अंत में क्या समझना जरूरी है
जैविक खेती सिर्फ ट्रेंड नहीं, एक लंबा फैसला है। सही जानकारी और सही समय पर कदम उठाने से यह फैसला फायदे में बदल सकता है। बिना समझे किया गया बदलाव खर्च बढ़ा सकता है, जबकि योजना का सही इस्तेमाल नुकसान से बचाता है।
Disclaimer & Trust Note
यह जानकारी सरकारी पोर्टल, कृषि विभाग के दिशानिर्देश और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। यह वेबसाइट किसी भी सरकारी विभाग या बैंक की आधिकारिक वेबसाइट नहीं है। नियम, प्रक्रिया और समय-सीमा बदल सकती है। किसी भी आवेदन या वित्तीय फैसले से पहले संबंधित कृषि कार्यालय, बैंक या आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।










