
नमस्कार दोस्तों ये जो “रोज़ ₹333 जमा करके करीब ₹17 लाख बनाने” वाली पोस्ट ऑफिस RD स्कीम वायरल हो रही है, इसे समझने के लिए थोड़ा प्रैक्टिकल तरीके से देखना ज़रूरी है. कई जगह सोशल मीडिया पर इसे ऐसे बेचा जा रहा है जैसे बस पैसे डालो और रातों-रात करोड़पति जैसा एहसास, पर असल तस्वीर थोड़ी अलग है.
रोज़ ₹333 वाली बात असल में है क्या?
सीधी भाषा में समझें तो ₹333 रोज़ का मतलब हुआ लगभग ₹10,000 महीने की रिकरिंग डिपॉज़िट (RD). यानी आप हर महीने एक फिक्स रकम पोस्ट ऑफिस में RD के रूप में जमा करते हैं. पोस्ट ऑफिस RD में आमतौर पर 5 साल की लॉक-इन अवधि होती है, पर जो ₹17 लाख वाला calculation वायरल हो रहा है, वो लंबी अवधि (10–15 साल) तक लगातार जमा करने और compounding से जुड़ा होता है. कई फाइनेंस यूट्यूबर और व्हाट्सऐप मैसेज में ये दिखाया जा रहा है कि अगर आप रोज़ ₹333 अलग रख दें, तो कुछ सालों बाद आप लगभग 17 लाख के मालिक बन सकते हैं.
लेकिन यहां एक बात लोग भूल जाते हैं – इतना पैसा बनने के लिए:
- काफी लंबा समय लग सकता है
- बीच में रोक देने पर calculation पूरा बिगड़ जाता है
मेरे खुद के एक रिश्तेदार ने RD बीच में ही तोड़ दी थी, सिर्फ इस वजह से कि कुछ महीनों तक पैसा नहीं बच पाया, और फिर उन्हें लगा कि “ये स्कीम काम ही नहीं करती”.
लोग यहाँ सबसे ज़्यादा गलत समझ लेते हैं
बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि “रोज़ ₹333 डालेंगे और कुछ ही साल में 17 लाख मिल जाएंगे”. असल में रकम इतनी जल्दी नहीं बनती, खासकर अगर अवधि सिर्फ 5 साल या 7 साल हो.
किसी भी रिकरिंग डिपॉज़िट में दो चीज़ें अहम होती हैं:
- ब्याज दर (interest rate)
- कितने साल तक लगातार जमा करेंगे
मान लीजिए कोई व्यक्ति 10 साल तक ₹10,000 हर महीने RD में जमा करता है. तो कुल principal लगभग ₹12 लाख के आसपास होता है. अब ब्याज जोड़कर राशि लगभग 16–17 लाख के आसपास पहुंच सकती है, ये interest rate पर depend करता है.
यहीं पर सोशल मीडिया वाले लोग खेल कर देते हैं – वो बस final amount हाई दिखाते हैं, पर ये साफ नहीं बताते कि:
- कितने साल तक जमा करना पड़ेगा
- ये सिर्फ अनुमान (illustration) है, guarantee नहीं
गांव के कई लोग ऐसे मैसेज देखकर सोच लेते हैं कि “शायद सरकार ने कोई नई कमाल की स्कीम निकाल दी है”, जबकि असल में ये बस normal RD calculation होता है.
क्या सच में यह स्कीम आम लोगों के काम की है?
थोड़ा ground reality सोचिए. हर आम परिवार के लिए रोज़ ₹333 यानी महीने के ₹10,000 बचाना आसान नहीं है, खासकर अगर सैलरी मध्यम या छोटी हो. जो लोग पहले से ही PF, LIC, बच्चों की फीस, घर का EMI सब संभाल रहे हैं, उनके लिए हर महीने 10,000 अलग रखना काफी बड़ा फैसला है. हाँ, जो लोग अच्छी स्थिर आय वाले हैं, उनके लिए ये एक अच्छा systematic saving option हो सकता है.
एक बात जो अक्सर कोई नहीं बताता – RD की सबसे बड़ी ताकत “discipline” है, न कि सिर्फ ब्याज. आप हर महीने मजबूरी में भी पैसा निकालकर अलग रखते हैं, यही चीज़ 10–15 साल बाद आपकी आदत और corpus दोनों बना देती है. मेरी राय में, अगर आपकी income स्टेबल है, आपकी basic जरूरतें और small emergency fund पहले से सेट है, तब इस तरह की monthly saving बहुत काम की हो सकती है. वरना सिर्फ viral poster देखकर कूद पड़ना सही नहीं.
Example से समझें कि पैसा कैसे बढ़ सकता है
मान लीजिए एक युवा ने 25 साल की उम्र से पोस्ट ऑफिस में हर महीने करीब ₹10,000 RD जैसे किसी disciplined saving में डालना शुरू किया. अगर वह 10 साल तक बिना gap के यह savings करता है, तो लगभग 12 लाख के आसपास उसकी कुल जमा रकम हो सकती है, उस पर ब्याज जोड़कर 16–17 लाख तक corpus बन सकता है (exact figure interest rate पर depend करेगा).
अब imagine कीजिए, अगर वही व्यक्ति 15 साल या 20 साल तक disciplined saving जारी रख दे, तो corpus और तेज़ी से बढ़ेगा. यहीं compounding और लंबी अवधि का मैजिक काम करता है, लेकिन इसकी शर्त है – बीच में छोड़ना नहीं. कई लोगों से सुना है कि वो 1–2 साल तक जोश में पैसा डालते हैं, फिर शादी, घर, गाड़ी, बच्चों की पढ़ाई जैसी जरूरतें आ जाती हैं और RD टूट जाती है. फिर वो कहते हैं “ये स्कीम में खास फायदा नहीं हुआ”. असल में गलती स्कीम की कम और हमारी consistency की ज़्यादा होती है.
क्या इस तरह की saving आपके लिए सही है?
खुद से कुछ simple सवाल पूछिए:
- क्या आप आराम से हर महीने ₹10,000 निकाल सकते हैं, बिना ज़्यादा तंगी के?
- क्या आपके पास पहले से 3–6 महीने का emergency fund है?
- क्या आप short-term जरूरतों के लिए अलग रकम रख चुके हैं?
अगर इन सवालों का जवाब “हाँ” में है, तो रोज़ ₹333 वाली saving approach आपके लिए काफी बढ़िया हो सकती है.
आप इसे सिर्फ पोस्ट ऑफिस RD में ही बांधने की बजाय, अपनी जरूरत के अनुसार FD, mutual fund SIP, या अन्य सुरक्षित विकल्पों के साथ mix भी कर सकते हैं (risk समझकर).
लेकिन अगर अभी आपकी income टाइट है, EMI या घर का खर्च ही मुश्किल से निकलता है, तो छोटी रकम से शुरू करना बेहतर रहेगा. शायद रोज़ ₹100 या ₹150, ताकि आदत भी बने और दबाव भी न लगे. मेरी साफ राय: ये idea बिल्कुल गलत नहीं, लेकिन इसे “नई जादुई स्कीम” मानना गलत है. ये बस एक disciplined saving formula है, जिसे अगर समझकर अपनाया जाए तो long term में मजबूत सहारा बन सकता है.
तीन छोटे सवाल–जवाब जो अक्सर सामने आते हैं
सवाल 1: क्या सच में पोस्ट ऑफिस की किसी “नई स्कीम” से ही 17 लाख बनते हैं?
जवाब: ज़्यादातर वायरल मैसेज किसी एक खास “नई” स्कीम पर नहीं, बल्कि normal RD या similar saving पर based calculation दिखाते हैं. राशि, ब्याज और समय को इस तरह सेट किया जाता है कि final number बड़ा दिखे.
सवाल 2: अगर मैं बीच में RD बंद कर दूँ तो क्या होगा?
जवाब: बीच में RD रोकने या तोड़ने पर वो बड़ा 17 लाख जैसा corpus बन ही नहीं पाएगा. आपको सिर्फ उतना principal और थोड़ा सा ब्याज मिलेगा, जितना उस समय तक जमा हुआ है, कई बार penalty भी लग सकती है.
सवाल 3: क्या छोटे amount से शुरू करके भी अच्छा corpus बन सकता है?
जवाब: हाँ, हो सकता है, पर फिर target amount भी realistic रखना पड़ेगा. अगर आप रोज़ ₹100 से शुरू करें और income बढ़ने पर amount धीरे–धीरे बढ़ाते जाएँ, तो लंबी अवधि में अच्छा धन बन सकता है, भले ही 17 लाख से थोड़ा कम या ज़्यादा क्यों न हो.
आखरी में कुछ जरूरी बातें
सच कहूँ तो, इस तरह के viral poster देखकर एक बात हमेशा याद आती है – पैसा कभी shortcut से नहीं बनता, वो रोज़ के छोटे–छोटे फैसलों से बनता है. अगर आप रोज़ ₹333 नहीं भी बचा पा रहे, तो भी guilt मत लीजिए. शायद आज आप ₹100 ही बचा पाएं, लेकिन consistency रखेंगे तो यही छोटी कोशिश कुछ साल बाद आपको बहुत मजबूत बना सकती है. जो भी step उठाएँ, उसे पूरी तरह समझकर उठाएँ, सिर्फ किसी WhatsApp forward या flashy thumbnail पर भरोसा करके नहीं.
Disclaimer
यह लेख केवल जागरूकता और शिक्षा के उद्देश्य से लिखा गया है. यह किसी भी तरह की financial सलाह या किसी विशेष निवेश उत्पाद की सिफारिश नहीं है. ब्याज दरें, नियम और स्कीम की शर्तें समय–समय पर बदल सकती हैं. किसी भी RD, FD, या अन्य निवेश में पैसा लगाने से पहले संबंधित पोस्ट ऑफिस, बैंक या registered financial advisor से लिखित जानकारी अवश्य लें. आपका लाभ–हानि पूरी तरह आपके निर्णय और जोखिम क्षमता पर निर्भर रहेगा.












